हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , जनरल क़आनी ने कहा कि इराक़ की सरकार और जनता द्वारा शहीद रहबर की अंतिम यात्रा आयोजित करने की इच्छा तथा इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की व्यापक तैयारियों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच गहरे आध्यात्मिक और जनसामान्य के संबंधों को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि शहीद रहबर द्वारा इराक़ी जनता के समर्थन और इराक़ की धार्मिक मरजइयत की भूमिका ने दाइश (आईएसआईएस) के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुसार, शहीद क़ासिम सुलेमानी ने इराक़ी युवाओं के साथ मिलकर दाइश के खिलाफ़ लड़ाई में भाग लिया।
जनरल क़आनी ने आगे कहा कि बाद में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शहीद क़ासिम सुलेमानी और हश्दुश शाबी के उपप्रमुख अबू मेंहदी अलमुहंदिस की हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा कि इराक़ में शहीद रहबर की भव्य अंतिम यात्रा, शहीद क़ासिम सुलेमानी और अबू मेंहदी अल-मुहंदिस की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा की तरह, ईरान और इराक़ की जनता की एकता को और अधिक मज़बूत करेगी तथा अमेरिकी नीतियों के मुक़ाबले में "ख़ून का बदला लेने" के संकल्प को और अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित करेगी।
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